रिपोर्ट- प्रवीण दवे
भरतपुर में निजी विद्यालय संचालक के साथ पुलिस द्वारा किए गए कथित अमानवीय व्यवहार और शुल्क वसूली अधिकारों की रक्षा को लेकर स्कूल क्रांति संघ राजस्थान के बैनर तले जिले के निजी विद्यालय संचालकों ने मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।
भरतपुर की घटना पर आक्रोश
संगठन से जुड़े दिलीप पोखरना ने जानकारी दी कि भरतपुर जिले के एक प्रतिष्ठित निजी सीनियर सैकेंडरी स्कूल के संचालक को थाना खेड़ली के एसएचओ द्वारा बिना वजह विद्यालय परिसर से घसीटकर थाने ले जाया गया। इतना ही नहीं, बकाया शुल्क के बावजूद दबाव बनाकर बिना आवेदन पत्र दिए ही टीसी जारी करवाई गई और उसके बाद थाने में ले जाकर मारपीट तथा शारीरिक यातनाएँ दी गईं। आरोप है कि संचालक को धारा 376 जैसे गंभीर प्रकरण में फंसाने की धमकी भी दी गई।
संगठन का कहना है कि यह न केवल संचालक की व्यक्तिगत गरिमा पर कुठाराघात है, बल्कि संपूर्ण निजी शिक्षा क्षेत्र को भयभीत करने वाली घटना है।
निजी स्कूलों के अधिकारों पर सवाल
विद्यालय संचालकों ने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि सरकारी विभागों में बिजली, पानी, शिक्षा या चिकित्सा सेवाओं का शुल्क बकाया हो तो वसूली तुरंत की जाती है। बोर्ड स्तर पर भी विलंब शुल्क की कई गुना वसूली होती रही है। ऐसे में निजी विद्यालयों से सेवा लेने के बाद शुल्क न चुकाना और उल्टा विद्यालय संचालकों को प्रताड़ित करना कहां तक उचित है?
उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष कई विद्यालयों के विद्यार्थियों की पाँचवी कक्षा की मार्कशीट केवल 20 रुपये खेल शुल्क बकाया रहने पर रोक दी गई थी। इससे बच्चों के मौलिक अधिकार प्रभावित हुए, लेकिन तब किसी ने सवाल नहीं उठाया।
संगठन की प्रमुख मांगें
संगठन ने ज्ञापन में तीन प्रमुख मांगें रखी—
- थाना खेड़ली के एसएचओ को तत्काल निलंबित कर विभागीय जांच की जाए।
- विद्यालय संचालक से हुई मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना के लिए सरकारी क्षतिपूर्ति दी जाए।
- शुल्क बकाया रहते हुए किसी भी विद्यार्थी को टीसी जारी न करने के स्पष्ट आदेश जारी किए जाएं।
आंदोलन की चेतावनी
स्कूल क्रांति संघ ने चेतावनी दी कि यदि समय रहते न्यायोचित कार्रवाई नहीं की गई तो यह मुद्दा राजस्थान स्तर पर बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
















