निम्बाहेड़ा के महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय (नूर महल) की बदहाली: न गेट, न सफाई, न बिजली-पानी; भीषण गर्मी में बच्चे बेहाल

पप्पु देतवाल निंबाहेड़ा

राज्य सरकार द्वारा महात्मा गांधी राजकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को मॉडल स्कूल के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन निम्बाहेड़ा के नूर महल स्थित महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यह विद्यालय वर्तमान में बुनियादी सुविधाओं के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है।

सुरक्षा राम भरोसे: विद्यालय का मुख्य गेट तक गायब
विद्यालय परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त नजर आ रही है। स्कूल का मुख्य द्वार (मेन गेट) नहीं होने के कारण परिसर में कोई भी बेरोक-टोक दाखिल हो सकता है। गेट के अभाव में विद्यालय की संपत्ति की सुरक्षा पर भी सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।

गंदगी का अंबार और सुविधाओं का टोटा
परिसर में सफाई व्यवस्था का नामोनिशान नहीं है। चारों तरफ फैली गंदगी और झाड़-झंखाड़ के बीच बच्चे पढ़ने को मजबूर हैं। विडंबना यह है कि स्कूल में न तो पीने के पानी की सुचारू व्यवस्था है और न ही बिजली की। ऐसे में भीषण गर्मी के इस मौसम में छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल में बैठना दूभर हो गया है। बिना पंखे और पानी के बच्चे पसीने से तर-बतर होकर पढ़ने को मजबूर हैं।

अभिभावकों में रोष
विद्यालय की इस दुर्दशा को लेकर स्थानीय लोगों और अभिभावकों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि नाम तो ‘महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय’ कर दिया गया, लेकिन सुविधाएं सामान्य स्कूलों से भी बदतर हैं। बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ हो रहे इस खिलवाड़ को लेकर प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्रशासन से सुधार की मांग
अब देखना यह है कि शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन इस ओर कब ध्यान देता है। क्या बच्चों को इस भीषण गर्मी में बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं मिल पाएंगी? क्षेत्रवासियों ने शीघ्र ही विद्यालय में गेट लगवाने, सफाई करवाने और बिजली-पानी की व्यवस्था सुचारू करने की मांग की है।

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