नंगली झमावत पहुंचा दलित अधिकार केन्द्र का जांच दल, जुटाए साक्ष्य……

अलवर जिले की पंचायत समिति मालाखेड़ा के नंगली झमावत गॉव मे दलित अधिकार केन्द्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम के नेतृत्व में 7 सदस्यीय जांच दल द्वारा ग्राम नंगली झमावत के दलित वाल्मीकि समुदाय के परिवार की आराजी को गैरकानूनी तरीके से दबंग आरोपियों द्वारा हथियारों से लैस होकर दबंगता से अपने नाम कराने, जबरन आराजी पर कब्जा करने, पीड़ित परिवार के घर को जेसीबी से तोड़ने, घर को जलाकर खाक करने, अनाज आभूषण इत्यादि को लूट कर ले जाने, जानलेवा हमला करने, गंभीर मारपीट करने, महिलाओं के साथ अश्लील हरकतें एवं बेअदब करने, जाति सूचक शब्दों से अपमानित करने, घटनाओं की बार-बार पुनरावृत्ति करने तथा मानवता को शर्मसार करने के मामले में जांच दल द्वारा पीड़ितों व गवाहों के बयान दर्ज कर दस्तावेजों का संकलन किया गया।
जांच में सामने आया कि उक्त नामजद आरोपी वीरेंद्र चौधरी, नेकीराम चौधरी उर्फ जाड़ी, अरुण चौधरी, पप्पू चौधरी, विशाल चौधरी, घमंडी, मुंशी, शहरून एवं उनके साथी अपराधिक प्रवृत्ति के लोग हैं। और गरीबों की भूमियों पर आए दिन जबरन व गैरकानूनी तरीके से कब्जा करते हैं।


आरोपियों द्वारा 31.01.2026 को दलित गरीब वाल्मीकि समुदाय के पीड़ितों को हथियारों की नोक पर रखकर जबरन खाली कागजों पर हस्ताक्षर करवाने की घटना कारित की गई। और 15.04.2026 को पीड़ितों के घर आकर प्राण घातक हमला कर दिया, आरोपियों ने जेसीबी ट्रैक्टरों से मकान को तोड़ दिया और अवैध हथियारों से फायरिंग की गई, घर में मौजूद महिलाओं, बच्चों व छोटे भाई पर गोलियां, तलवार, फर्सी, लाठियां चलाई गई व महिलाओं को बेअदब कर उनके साथ अश्लील हरकतें की गई, उनकी लज्जा भंग कर दी गई, यहां तक उनके कपड़े भी फाड़ दिए और पूरे घर में आग लगाकर घर को तहस नहस कर दिया तथा बचे हुए सामान जिसमें अनाज, सोने चांदी के आभूषण इत्यादि को जबरन लूट कर ले गए। उक्त प्रकरण की दलित पीड़ितों द्वारा पुलिस थाना मालाखेड़ा में लिखित प्राथमिकी दी गई किंतु प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, इसके बाद पुलिस अधीक्षक अलवर के आदेश पर देर रात्रि को पीड़ितों की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज की गई, इसके उपरांत आरोपियों द्वारा दबंगता से 18.04.2026 को रात्रि करीब 9:00 बजे दबंग आरोपियों द्वारा हथियारों की नोक पर दलित पीड़ितों के घर आकर प्राण घातक हमला किया गया, अवैध हथियारों से फायरिंग कर दहशत फैलाई और जान से मारने की धमकी देकर आराजी को छोड़ने पर मजबूर किया गया। उक्त प्रकरण की भी लिखित प्राथमिकी देने के बावजूद भी आज दिनांक तक पीड़ितों की प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है, आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया गया है, प्रकरण में अन्य आरोपियों के नाम भी सम्मिलित नहीं गए हैं, आर्म्स एक्ट व पीसीआर एक्ट की उपयुक्त धाराएं भी सम्मिलित नहीं की गई और ना ही घटना में प्रयुक्त अवैध हथियारों जेसीबी, ट्रैक्टर, बंदूक, देसी कट्टा, तलवार, लाठी डंडे इत्यादि को जप्त किया है। आरोपी प्रभावशाली हैं तथा प्रशासन में अपनी ऊंची पहुंच रखते हैं। और प्रशासन की मिलीभगत एवं उदानशीलता के कारण पीड़ित परिवार आज भी दहशत में है और खुले में जीवन जीने को मजबूर है।


घटना की गंभीरता को मद्देनजर रखते हुए केन्द्र ने घटना में सम्मिलित सभी आरोपियों को अविलंब गिरफ्तार करने, दलित समुदाय की आराजी को गैर कानूनी तरीके से गैर दलितों के नाम परिवर्तित करने वाले आरोपियों व लोकसेवकों के विरुद्ध अलग से प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विशेष जांच कराने, परिवर्तित नामांतरण को अविलंब निरस्त कराने, घटना में प्रयुक्त हथियारों अवैध बंदूक, देसी कट्टा, तलवार, लाठी डंडे, जेसीबी, ट्रैक्टर, लूटे गए अनाज, आभूषण व अन्य सामान को अविलंब जप्त करने, प्रकरण में आर्म्स एक्ट, पीसीआर एक्ट एवं बीएनएस की उपयुक्त धाराएं सम्मिलित करने, पीड़ित परिवार को समुचित सुरक्षा देने, नियम 12(1) के अन्तर्गत जिला प्रशासन के जिला कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक द्वारा मौके पर जाकर संपत्ति के हुए नुकसान व पीड़ित परिवार की सूची तैयार करने, पीड़ितों को नियम 11 के अंतर्गत यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता व भरण पोषण तत्काल उपलब्ध कराने, नियम 15 के तहत ग्रह स्थल का आवंटन, पुनर्वास, ईंट पत्थर, चिनाई, गृह उपलब्ध करवाने, दैनिक आवश्यकता की वस्तुओं की आपूर्ति जिसमें बिजली, पानी, भोजन की तुरंत व्यवस्था करवाने, नियम 12(4) के अंतर्गत अविलम्ब आर्थिक मुआवजा, बर्तन, चावल, गेहूं, दाल दलहन की तीन माह तक लगातार उपलब्धता सुनिश्चित कराने, समस्त मामले की अन्वेषण के दौरान नियम 15(क)10 के अंतर्गत वीडियो रिकॉर्डिंग करने, नियम 7(2)(1) के अन्तर्गत 60 दिवस में सम्पूर्ण जांच पूर्ण कर आरोपियों के विरुद्ध विशेष न्यायालय में चालान पेश करने तथा इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांगे की गई है।
उक्त जांच दल में केंद्र के जिला समन्वयक शैलेष गौतम, एडवोकेट प्रकाश चन्द सागर, निरमा बौद्ध, तारा देवी, डॉ रामचरण मेहरा, सुरेंद्र बौद्ध, अजय कुमार सम्मिलित रहे।
जांच दल ने बताया कि उक्त प्रकरण की समुचित रिपोर्ट तैयार कर मामले में कठोर कार्यवाही करने हेतु जल्दी ही उच्च अधिकारियों एवं उच्च आयोगो को प्रेषित किया जाएगा।

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