जीला -प्रतापगढ
तहसील-छोटीसादडी
रिपोटर-प्रहलाद जणवा
नवज्योति, दलोट। कस्बे में आबकारी विभाग की लापरवाही के चलते शराब दुकानों पर मनमानी कीमत वसूली का मामला सामने आया है। अब तक यह शिकायतें मुख्यतः रात आठ बजे के बाद अवैध बिक्री को लेकर आती थीं, लेकिन अब दिन के समय भी ग्राहकों से तय कीमत से अधिक राशि वसूली जा रही है।
ग्राहकों की शिकायतों के बाद हकीकत सामने आई है कि शराब की बोतलों पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) से 20 से 30 रुपए तक अधिक वसूले जा रहे हैं। इतना ही नहीं, निर्धारित समय के बाद भी चोरी-छिपे शराब बेची जा रही है, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
नियमों के अनुसार रात में निर्धारित समय के बाद शराब बिक्री पर रोक है, लेकिन दुकानों पर शटर गिराकर अंदर ही अंदर ग्राहकों को अधिक कीमत लेकर शराब दी जा रही है। कई स्थानों पर शराब को अलग जगह छिपाकर ग्राहकों को ऊंचे दामों पर बेचा जा रहा है।
ग्राहकों का आरोप है कि ठेका संचालक “बोतल वही, कीमत नई” का तरीका अपनाकर पुराने स्टॉक पर भी नई दरें वसूल रहे हैं। या तो बोतलों पर नए रेट के लेबल चिपकाए जा रहे हैं या सीधे एमआरपी से अधिक कीमत ली जा रही है।
एक ग्राहक ने बताया कि चंदेरा रोड स्थित दुकान पर 730 रुपए अंकित बोतल के बदले 790 रुपए मांगे गए। विरोध करने पर सेल्समैन ने साफ कह दिया कि “यही रेट है, लेना है तो लो।” इसी तरह एक अन्य मामले में 175 रुपए एमआरपी वाली बीयर के लिए 190 रुपए वसूले गए।
रेट लिस्ट नहीं, मनमानी जारी
आबकारी विभाग द्वारा दुकानों पर रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगाने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन अधिकांश दुकानों पर यह बोर्ड नदारद हैं। इससे ग्राहकों को सही कीमत की जानकारी नहीं मिल पा रही और सेल्समैन खुलेआम मनमानी कर रहे हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर कस्बे तक आदेशों की अनदेखी हो रही है। विभागीय कार्रवाई के अभाव में शराब ठेकेदारों के हौसले बुलंद हैं। कई वर्षों से ओवररेटिंग की शिकायतें आ रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
इस पूरे मामले में आबकारी विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। लोगों का कहना है कि विभाग की अनदेखी या मिलीभगत के कारण यह अवैध वसूली लगातार जारी है।
















